सब मतलबी थे

कालेज में बच्चों की लाइन लगी हुई थी।फिस जमा करने के लिए जिसमें मैं भी थी और मेरी एक दोस्त।
देर तक खड़ा रहने की वजह से मेरी दोस्त बेहोश हो गई। मेरे हाथ में मेरी दोस्त का चश्मा था और मेरी दोस्त को मै एक हाथ से पकड़ी थी। मैंने कहा कोई आओ इसे पकड़ने में मेरी मदद करो। कोई चश्मा पकड़ने तक नहीं आया।
उस दिन मुझे समझ आया सब मतलबी है सबके कर्मों का फल मिलेगा।

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