मेला में सब मस्ती कर रहे थे लेकिन
सभी लोग मेले में घूम रहे थे कोई परिवार के साथ कोई दोस्तो के साथ कोई रिश्तेदारो के साथ। सभी लोग एक से एक चीजें खरीद रहे थे खा रहे थे झूला झूल रहे थे। मेरा कौन था अकेला भीड़ में खड़ा भूख लगी थी कुछ खाने को पैसे नहीं थे। वहीं खड़े होकर सोच रहा था बाकी लोग खुश हैं बस मैं नहीं। क्योंकि मैं एक भिक्षुक था मेरे जीवन का तो कोई अर्थ ही नहीं है किसी से कुछ मांगने पर भी लोग ऐसे भगा देते हैं जैसे हम निर्जीव है
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