मुझे भी पढ़ना था
मेरा इन्टर कॉलेज पूरा हो चुका था।अब ग्रेजुएशन करना था। मेरे पिता जी ठेला लगाते थे। लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ने लगी जिससे वह अब काम नहीं कर सकते थे।मेरी मां दूसरे के घर बर्तन धूलकर खर्चा चला रही थी।अब वो पैसा पापा कि बिमारी में लग रहा था। मुझे फिस चाहिए था अपनी ग्रैजुएशन के लिए लेकिन फिस कि व्यवस्था नहीं हो पाया मैंने एडमिशन नहीं लिया मेरा छोटा भाई था उसका भी खर्चा था।तब मैं अपने पिता जी का ठेला चलाने लगीं। मेरे कुछ कर दिखाने का सपना वहीं टूट गया।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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