हमको अलग समझा
त्योहार था। मैं जहां काम करतीं थीं। वहां अपने परिवार को लेकर गई सबसे मिलाने। मालिक के घर उनके मेहमान आये हुए थे। मेरे परिवार को उन्होंने किनारे बैठा दिया और बोले थोड़ी देर में आता हूं।वह अपने मेहमानों को मिठाई पकवान दे रहे थे बातें कर रहे थे।,,,,,
एक घंटा बीत गया हमें किसी ने पानी तक नहीं पूछा,,,,,,
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