थोड़ा अलग नज़र से
एक लड़की थी वह इस दुनिया को थोड़ा अलग नज़र से देखती थी।सब कुछ और देखते सोचते तो वो कुछ और ही देखती सोचती। सभी लोग सर्कस देख रहे थे लेकिन वो सड़क पर चल रहे कुत्ते को देख रही थी जिसका बच्चा इस पार ही रह गया था। लोग त्योहार मना रहे थे लेकिन वो उन लोगों को देख रही थी जिनके पास दो वक्त कि रोटी तक नहीं।एक तरफ जमादार झाड़ू लगा रहा था सफाई कर रहा था दूसरी तरफ साफ जगह पर पाना खाकर थूक रहे थे। सब अपनो लिए कमाने का सोचते थे। लेकिन वो जरुरतमंदों के लिए कमाने का सपना देखती थी। और भी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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