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Showing posts from October, 2022

पता है कोई ध्यान नहीं देगा

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एक कामवाली थी एक दिन वो घर में पोंछा लगा रहीं थीं एक व्यक्ति आया वह बिना जूता निकाले ही अन्दर चला गया पूरा जूते का छाप पड़ गया और वह दोबारा पोंछा लगा रहीं थीं तभी एक और व्यक्ति आया और उसके हाथ पर चढ़ कर चला गया फिर वह सोचने लगी कि जो काम लोग करते नहीं शायद उसको समझते भी नहीं ।

आखिर क्यों

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एक परिवार का घर बहुत पुराना था उसमें रोशनी आने में बहुत दिक्कत हो रहा था। तो उन्होंने सोचा कि एक खिड़की खोल दिया जाय। लेकिन जैसे ही लोग खिड़की खुलवाने जा रहे थे वैसे ही आस पास के लोग विरोध करने लगे और बोले कि हमारे घर के सामने खिड़की नहीं खुलेगा।उस गरीब परिवार ने खिड़की नहीं खुलवाया।जब भी बिजली कटता था उनके बच्चों को पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत होती थी फिर बच्चो ने बहुत मेहनत किया और आगे जाके बहुत बड़े आफिसर बन गए और फिर उन्होंने खिड़की खुलवायी तब बोलने वाले देखते रह गए।

कूड़ा वाला

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एक कूड़ा वाला रोज कूड़ा उठाने आता था। लोग उसे कूड़ा तो देते ही थे लेकिन साथ में उसे घर का दूसरा कूड़ा भी जबरदस्ती दे देते थे जैसे सीमेंट का गमला और बालु । फिर कूड़ेवाले ने कहा कि दिवाली पर मुझे भी मिठाई चाहिए यह कह कर वह जाने लगा तभी उसे आवाज सुनाई दी कि कुड़ेवाले को मिठाई मत देना उसे दाना चूड़ा दे देना। फिर कूड़ेवाले ने सोचा कि मैं इनका ज्यादा कूड़ा लेता था तो मेरा वाहन भारी हो जाता था जिससे मुझे वाहन खींचने में दिक्कत होती थी फिर भी मैं इनका कूड़ा ले जाता था।और आज मैं इनके मिठाई के भी काबिल नहीं हूं।

हमें अपनी पुरानी परिस्थितियों को भूलना नहीं चाहिए

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एक बस्ती में एक व्यक्ति कि अच्छी नौकरी लगी उसका व्यवहार बहुत अच्छा था और उसके काम की वजह से उसको और बड़ा पद मिल गया। लेकिन उसके बाद उसका व्यवहार बहुत बदल गया वह बहुत घमंड में लोगों से बात करने लगा। वो अपने आप को बहुत बड़ा समझने लगा। उसके बाद कुछ लोग बोलें की इतना ऊपर पहुंचने पर सबको घमंड आ जाता है। तो क्या लोग सही बोल रहे थे पद के साथ व्यक्ति का व्यवहार बदल जाना चाहिए। व्यवहार बदलने पर पोस्ट बदलते देरी नहीं लगती। इसलिए किसी चीज पर घमंड नहीं करना चाहिए।

इनपर भी कोई ध्यान दें दो

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गाय का एक बछड़ा था। बहुत भूखा था।उसको सड़क के उसपार जाना था रोटी खाने के लिए। जैसे ही वो आगे बढ़ा एक कार वाला बहुत स्पीड में आया और बछड़ा टकराते टकराते बचा वह पीछे हटा फिर वह उसपार जाने लगा तो कई बाईक वाले सामने आ गये जिससे वह सड़क पार न कर सका उसके बाद वहां शहर में ट्रैफिक जाम लग गया जिससे वह बछड़ा उस पार न जा सका। वह बछड़ा वहीं खड़ा रह गया और उस रोटी को निहारते रहे गया 

भूल गए शायद

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एक परिवार में 5 भाई 3 बहने थी। जब 5 भाईयों कि नौकरी लग गई तब उनके पिता ने एक एक कर के सबकी शादी करा दी।और बाकी 2 बहनो की भी अच्छे घर में शादी हो गई।अब मां बाप बुढ़े हो गये थे और बीमार रहने लगे थे।भाई लोग काम की वजह से दूसरे शहरों में अपने परिवार को लेकर चले गए। और बहने अपने ससुराल में रहने लगी अब घर पर बस माता पिता और उनकी सबसे छोटी बेटी घर में अकेले थे।उनकी छोटी बेटी की शादी करानी थी लेकिन किसी भाई ने उनकी न सुनी बहाना बनाने लगे। छोटी बेटी अकेले ही अपने माता पिता की सेवा कर रही थी शादी तो दूर की बात है कोई माता पिता और छोटी बहन का हाल चाल भी नहीं लेने आया।

ऐसा क्यों

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एक परिवार में पति पत्नी और उनके बच्चे थे।पति हमेशा दारू पीकर अपनी पत्नी को मारता था और बच्चों को भी गालियां देता था।औरत क्या करती रो रोकर दिन बीता देती । पत्नी स्कूल में झाड़ू पोंछा लगाकर घर का खर्चा चला रही थी। फिर एक दिन उसका पति उससे दारू पीने के लिए पैसे मांगने लगा और पत्नी ने नहीं दिया तो पति ने उसको छत से धक्का दे दिया जिससे वो बुरी तरह घायल हो गई और अगले दिन वो अस्पताल में भर्ती थी।

क्यों लड़ पड़े।

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दो भाई बचपन से साथ में बहुत खुश रहते थे। दोनों बड़े हो गए दोनों की शादी हो गई। उसके बाद हर छोटी से छोटी बातों पर उनका झगड़ा होने लगा। अब बात आई बंटवारे की तो दोनों भाई जैसे एक दूसरे के बहुत बड़े दुश्मन है थोड़े से जमीन के लिए एक भाई ने दूसरे भाई का सर फोड़ दिया और दूसरे भाई के साथ वालो ने पहले भाई को इतना मारा कि अगले दिन दोनों भाई अस्पताल में भर्ती थे। रिश्तों को मजबूत बनाऐ । थे।ी

औकात सबकी होती है

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एक मजदूर का घर बन रहा था उसका ईंट उसके घर के पास ट्रैक्टर के जरिए गीराना था लेकिन रास्ते में एक कार खड़ी थी उससे हटाने के लिए बोला लेकिन कार वाले ने नहीं हटाया। उल्टा उसने मजदूर को बहुत गालियां दी यहां तक कि उसने बोला तुम्हारी औकात क्या है। मजदूर ने कुछ नहीं बोला। वो अपना ईंट वहीं से उठाकर अपने घर ले जाने लगा कड़ी धूप में।

मेला में सब मस्ती कर रहे थे लेकिन

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सभी लोग मेले में घूम रहे थे कोई परिवार के साथ कोई दोस्तो के साथ कोई रिश्तेदारो के साथ। सभी लोग एक से एक चीजें खरीद रहे थे खा रहे थे झूला झूल रहे थे। मेरा कौन था अकेला भीड़ में खड़ा  भूख लगी थी कुछ खाने को पैसे नहीं थे। वहीं खड़े होकर सोच रहा था बाकी लोग खुश हैं बस मैं नहीं। क्योंकि मैं एक भिक्षुक था मेरे जीवन का तो कोई अर्थ ही नहीं है किसी से कुछ मांगने पर भी लोग ऐसे भगा देते हैं जैसे हम निर्जीव है